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बुधवार को वित्तीय बाज़ारों में तेज़ी आई। इसकी वजह अमेरिका में महंगाई का कम होना, मंदी की आशंकाओं का घटना और रूस-यूक्रेन शांति वार्ता में प्रगति रही।
अमेरिकी टैरिफ़ की खबरों और ईरान के साथ तनाव के चलते बाज़ारों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे मोमेंटम ट्रेडर सतर्क हैं।
सोमवार को हल्के आर्थिक कैलेंडर और जोखिम से जुड़ी मिली-जुली खबरों के कारण बाज़ार में लिक्विडिटी कम रही, हालांकि इक्विटी में भारी बिकवाली हुई।
पिछला सप्ताह ज्यादातर सकारात्मक रहने के बाद सोमवार को ट्रेडिंग का रुख सतर्क बना हुआ है। चीन में अपस्फीति की स्थिति और अमेरिका के एल्युमिनियम व स्टील टैरिफ़ को लेकर बढ़ती चिंताएँ इसकी वजह हैं।
अस्थिर गुरुवार के बाद शुक्रवार को बाज़ार का रुझान मिला-जुला रहा। ट्रेडर्स अहम अमेरिकी रोज़गार आंकड़ों और Fed चेयर Jerome Powell के भाषण का इंतज़ार कर रहे हैं।
Canada और Mexico के लिए टैरिफ़ में एक महीने की राहत से जोखिम लेने की भावना बढ़ी और बुधवार को अमेरिकी डॉलर में तेज़ गिरावट आई।
अमेरिका के कनाडा, मेक्सिको और चीन पर टैरिफ लागू करने के साथ जवाबी उपायों ने मंगलवार को बाज़ारों को हिला दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 04 मार्च से कनाडा और मेक्सिको पर 25% टैरिफ़ लगाने की घोषणा की।
सोमवार को ट्रेडिंग का रुझान मिला-जुला है। चीन से मिली खबरों के चलते थोड़ी आशावादिता है, जबकि बाजार यूक्रेन-रूस शांति वार्ता पर अपडेट का इंतज़ार कर रहे हैं।
शुक्रवार की शुरुआत में बाज़ार का रुझान नकारात्मक बना हुआ है। एशियाई ट्रेडर्स अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ़ घोषणाओं पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कई मुद्दों पर बात हुई। महीने के अंत में बाज़ार में पोज़िशनिंग के बीच इससे बाज़ार में चिंता बढ़ी।
जर्मनी के चुनाव नतीजों के बाद बाज़ारों ने सप्ताह की शुरुआत बढ़त के साथ की, जिससे जोखिम वाले एसेट्स को बढ़ावा मिला।