पिछले दिन की हाई-लो ब्रेकआउट रणनीति डे ट्रेडिंग की एक तकनीक है, जो ट्रेडरों को लॉन्ग या शॉर्ट पोज़िशन लेने के कई मौके देती है। इसका मुख्य विचार ट्रेंडिंग मूव शुरू होने से पहले, ट्रेंड के सबसे मज़बूत चरण की पहचान करना है। किसी भी दूसरी डे ट्रेडिंग रणनीतिकी तरह, पिछले दिन की हाई-लो ट्रेडिंग रणनीति में सीमित समय के भीतर टेक्निकल एनालिसिस के कई डेटा पॉइंट्स को प्रोसेस करना पड़ता है। इसलिए, इसमें मुनाफ़े की अच्छी संभावना होने के बावजूद, शुरुआती लोगों के लिए यह काफ़ी जटिल हो सकती है।

आज हम इस रणनीति के सभी फ़ायदों और नुकसानों के साथ-साथ वास्तविक बाज़ार स्थितियों में इसका इस्तेमाल करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।
यह विचार काफ़ी सरल है। इस रणनीति में ट्रेडरों को अब 5 से 10 दिनों की रेंज पर नज़र रखने की ज़रूरत नहीं होती। इसके बजाय, वे पिछले दिन की हाल की रेंज के लो और हाई पर ध्यान देते हैं। दिन भर किसी एसेट की ट्रेडिंग करने वाले बाज़ार प्रतिभागियों के आधार पर हर स्टॉक की अपनी एक खास चाल होती है। वहीं, बियर और बुल दोनों ही ऐसी खास ट्रेडिंग सीमाएँ तय करते हैं, जो किसी स्टॉक को एक विशेष दिशा में बढ़ने से रोकती हैं।
पिछले दिन की ब्रेकआउट रणनीति का मकसद इन रेंज पर नज़र रखना और उनका फ़ायदा उठाते हुए लॉन्ग या शॉर्ट पोज़िशन के साथ बाज़ार में एंट्री करना है। इस रणनीति का इस्तेमाल करने के लिए ट्रेडरों को इन शर्तों को पूरा करना चाहिए:



हर ट्रेडिंग रणनीति की तरह, पिछले दिन के हाई और लो पर आधारित इस तरीके के भी कुछ फ़ायदे और नुकसान हैं। आपको हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि इस रणनीति का इस्तेमाल मुख्य रूप से शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के लिए किया जा सकता है।
फ़ायदे:
नुकसान:
इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।