
मंगलवार की शुरुआत में वैश्विक बाज़ारों का रुख़ आशावादी रहा। इसके साथ मिले-जुले अमेरिकी आँकड़ों और अहम घटनाओं से पहले की पोज़िशनिंग ने अमेरिकी डॉलर पर दबाव डाला। बाज़ार को प्रभावित करने वाले कारकों पर नज़र डालें तो, सुस्त एशियाई सत्र के दौरान चीन और रूस से आई ख़बरें चर्चा में रहीं। इसके बाद ECB की अध्यक्ष Christine Lagarde की टिप्पणियों से यूरो को बढ़ावा मिला।
इसके चलते G10 मुद्राओं में AUDUSD और EURUSD अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बाज़ार के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वालों में आगे हैं। वहीं, USDCHF की चाल अनिश्चित दिख रही है, जबकि कनाडा की महंगाई और अमेरिकी आंकड़ों का इंतज़ार कर रहे ट्रेडर्स के बीच USDCAD को तेल की कीमतों में हल्की तेज़ी से समर्थन नहीं मिल पा रहा है।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयरों में मामूली बढ़त हुई। S&P500 Futures और यूरोप व ब्रिटेन के शेयरों में भी तेजी आई। दूसरी ओर, बॉन्ड यील्ड में सुधार हुआ और अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से कमोडिटी को फायदा मिला।
दूसरी ओर, भारी मात्रा में ऑप्शंस की एक्सपायरी से पहले BTCUSD और ETHUSD में तेज़ी की रफ़्तार फिर लौट रही है। जुलाई को लेकर आशावाद भी बढ़ रहा है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से इस महीने क्रिप्टोकरेंसी के खरीदारों को फ़ायदा हुआ है।
प्रमुख एसेट्स में हालिया उतार-चढ़ाव इस प्रकार हैं:



हालांकि चीन से आ रही खबरें सकारात्मक दिख रही हैं, रूस से जुड़े बड़े भू-राजनीतिक तनावों की कमी और अमेरिकी डॉलर में गिरावट ने हाल के दिनों में ट्रेडर्स का रुख सकारात्मक बनाए रखा। इसके साथ ही, ECB अध्यक्ष लागार्ड की सकारात्मक टिप्पणियों ने EURUSD पेयर को आगे बढ़ाया।
ECB की लैगार्ड ने पुष्टि की कि महंगाई के ख़िलाफ़ लड़ाई अभी ख़त्म नहीं हुई है। उन्होंने आगे और ब्याज दरें बढ़ाने का संकेत दिया। इस खबर के बाद यूरो ने इंट्राडे का नया उच्च स्तर छुआ।
चीनी कंपनियों को लेकर आशावाद और PBoC के मनी मार्केट के कदम एशियाई शेयर ट्रेडर्स को सहारा दे रहे हैं। ध्यान दें कि चीन में विदेशों में पंजीकरण के नियम आसान होने की संभावना है, क्योंकि लॉबिस्ट बीजिंग समर्थित कंपनियों के लिए आसान लिस्टिंग नियमों के पक्ष में हैं।
इसके बावजूद, ऑप्शंस बाज़ारों का सकारात्मक रुझान और क्रिप्टो के लिए ऐतिहासिक रूप से अच्छा रहने वाला जुलाई, BTCUSD और ETHUSD को मज़बूत बनाए रखने में मददगार रहे। ऐसा तब भी हुआ जब अमेरिकी SEC लगातार इस आशावाद को चुनौती दे रहा है।
ECB की लैगार्ड ने अभी बात की है, लेकिन अमेरिका और UK के कई केंद्रीय बैंकर्स वार्षिक ECB फ़ोरम में भाषण देने वाले हैं और वे बाज़ारों को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिका के ड्यूरेबल गुड्स ऑर्डर्स और CB कंज़्यूमर सेंटीमेंट के आंकड़ों पर भी नज़र रखना अहम है। अगर नीति-निर्माता लैगार्ड की तरह “लंबे समय तक ऊंची” दरों का समर्थन करते हैं और अमेरिकी डेटा भी सकारात्मक चौंकाने वाले नतीजे देता है, तो अमेरिकी डॉलर में रिकवरी हो सकती है।
आपकी ट्रेडिंग किस्मत आपका साथ दे!