
बुधवार की शुरुआत में NZDUSD बाज़ार की मंदी की चाल में सबसे आगे रहा, क्योंकि ट्रेडर्स ECB फ़ोरम में प्रमुख केंद्रीय बैंकर्स के भाषणों की तैयारी कर रहे हैं। कार्यक्रम से पहले की चिंता के अलावा, अमेरिका-चीन संबंधों को लगा नया झटका, अमेरिका के मज़बूत आंकड़े और ऑस्ट्रेलिया की निराशाजनक महंगाई ने भी जोखिम लेने की चाह पर दबाव डाला।
जहां कीवी जोड़ी 1.0% गिरकर गिरावट की अगुवाई कर रही थी, वहीं AUDUSD दूसरे स्थान पर रहा। बाजार के कुछ प्रतिभागियों को RBA की एक और सख्त मौद्रिक नीति वाली चौंकाने वाली घोषणा की झूठी उम्मीदों के बाद नुकसान से उबरना पड़ा। इस बीच, लगातार दो दिन की गिरावट के बाद अमेरिकी डॉलर में फिर तेजी आई, जबकि सोने की कीमत तीन महीने के नए निचले स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, बढ़ते इन्वेंटरी फ्लो और रूस व चीन से जुड़ी भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण सप्लाई में कमी की आशंकाओं के बीच कच्चे तेल में मामूली बढ़त दर्ज हुई।
अन्यत्र, मज़बूत अमेरिकी डॉलर का EURUSD और USDJPY पर सबसे कम असर दिख रहा है। ECB के अधिकारी आक्रामक मौद्रिक नीति का बचाव कर रहे हैं, जबकि जापान के हस्तक्षेप की चर्चाओं को भी समर्थन मिल रहा है।
ध्यान दें कि BTCUSD और ETHUSD, दोनों में 1.0% से अधिक की गिरावट आई है। आगे और नियम लागू होने की आशंका के बीच, Bitcoin ETF को लेकर US SEC की राहत की खबर भी ट्रेडरों में उत्साह नहीं जगा पाई।
प्रमुख एसेट्स में हालिया उतार-चढ़ाव इस प्रकार हैं:



केंद्रीय बैंकरों के कई भाषणों से पहले बना सतर्क माहौल बुधवार की शुरुआत में बाज़ार को जोखिम से बचने की ओर ले जा रहा है। जोखिम से बचने की इस प्रवृत्ति को मज़बूत अमेरिकी आंकड़े और ऊंची ब्याज दरों की आशंकाएं बढ़ा सकती हैं। अमेरिका और चीन के बीच और तनाव की आशंका भी इसकी वजह हो सकती है।
इससे अमेरिकी डॉलर में फिर से तेजी का रुझान लौटा, जबकि कमोडिटी में मिला-जुला रुख रहा। ट्रेडर हालिया घटनाक्रम पर और स्पष्टता का इंतज़ार कर रहे हैं।
निराशावाद की कमी के बावजूद, मंदड़ियों को नियंत्रण बनाए रखने में मुश्किल हो रही है।
दूसरी ओर, अमेरिकी SEC ने और Bitcoin ETF को मंज़ूरी दी है, लेकिन इंडस्ट्री के नेताओं के साथ उसका टकराव और आगे के नियमों की आशंकाएं BTCUSD और ETHUSD पर दबाव बनाए हुए हैं।
जहाँ इवेंट से पहले की चिंता, मज़बूत अमेरिकी आँकड़े और अमेरिका-चीन तनाव बाज़ारों को शुरुआती दिशा दे रहे हैं, वहीं स्पष्ट संकेत पाने के लिए ECB फ़ोरम में केंद्रीय बैंकरों के बयान अहम होंगे। इसकी वजह नीति-निर्माताओं की यह मानने में हिचकिचाहट हो सकती है कि हाल में ऊँची ब्याज दरों ने संबंधित अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुँचाया है।
आपकी ट्रेडिंग किस्मत आपका साथ दे!