
कुछ विश्लेषकों के मुताबिक, चांदी के बाज़ार में बिकवाली का दबाव बढ़ रहा है। इसके पीछे कई अहम वजहें हैं। पहली वजह चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं हैं। दूसरी वजह आगामी आसान मौद्रिक नीति चक्र में फेडरल रिज़र्व की पहली ब्याज दर कटौती को लेकर बदलती उम्मीदें हैं।
फिर भी, कीमती धातुओं में चांदी के उल्लेखनीय कमजोर प्रदर्शन के बावजूद, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी गिरावट खरीदारी के और अवसर दे सकती है।
रातोंरात, चीनी निवेशकों ने चांदी बेचना शुरू कर दिया। विश्लेषकों का कहना है कि चीन की कमजोर होती अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण यह धातु की औद्योगिक मांग को प्रभावित करने वाला एक कारक हो सकता है। देश ने अपनी मौजूदा मौद्रिक नीति में बदलाव करने से इनकार कर दिया।



इसका मतलब है कि निकट भविष्य में मौद्रिक नीति में ढील देखने की संभावना कम है। हालांकि, इस बात का धातुओं पर नकारात्मक असर नहीं पड़ा। इसके अलावा, चीन अब भी कमोडिटी के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में शामिल है और उसकी गिरती अर्थव्यवस्था से धातुओं की मांग को नुकसान पहुंच सकता है।
चांदी की बात करें, तो मार्च में FED की ओर से ब्याज दर घटाए जाने की संभावना के चलते उत्तर अमेरिकी ट्रेडिंग सत्र से पहले इस धातु की कीमत सत्र के नए निचले स्तर पर आ गई। CME FedWatch Tool के अनुसार, बाज़ार मार्च में दरों में कटौती की संभावना 50% से कम मान रहा है।
अगर बाज़ार इस साल ब्याज दरों में अनुमानित कटौतियों को लेकर अपनी उम्मीदें घटाते हैं, तो चांदी पर सट्टा बिक्री का दबाव आ सकता है। हालांकि, कनाडाई बैंक का मानना है कि चांदी के दाम की एक निचली सीमा है।
कीमत में गिरावट के कारण चांदी वित्तीय और औद्योगिक धातु के तौर पर कम आकर्षक होती जा रही है। हालांकि, कुछ बाज़ार प्रतिभागियों को लंबी अवधि के नज़रिए से यह किफ़ायती सौदा लगती है।
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