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केंद्रीय बैंकों ने पिछले साल के मुकाबले कम सोना खरीदा, फिर भी खरीद Q1 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। चीन और सिंगापुर सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं।
2023 की पहली तिमाही में केंद्रीय बैंकों के वैश्विक गोल्ड रिज़र्व में इस कीमती धातु के 228 टन और जुड़ गए। पहली तिमाही के ये आंकड़े 2022 की इसी अवधि के मुकाबले 176% अधिक थे। 2000 में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल द्वारा ऐसे आंकड़े पहली बार जारी किए जाने के बाद से Q1 में यह सबसे तेज़ रफ़्तार है।
हालाँकि, बात सिर्फ़ रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञ इन आँकड़ों की अलग-अलग तरह से व्याख्या कर सकते हैं।
चार केंद्रीय बैंक प्रमुख सोना खरीदारों की सूची में शामिल हैं।
अपने आधिकारिक सोने के भंडार में 69 टन जोड़ने के बाद सिंगापुर पहले स्थान पर पहुंच गया है। सिंगापुर के मौद्रिक प्राधिकरण के अनुसार, जून 2021 के बाद सोने की खरीद में यह पहली बढ़ोतरी थी। इसकी वजह सिर्फ़ उभरते बाज़ारों में ही नहीं, बल्कि अन्य जगहों पर भी सोने की बढ़ती मांग थी।



पहले तीन महीनों में सबसे ज़्यादा सोना खरीदने वाले देशों की सूची में चीन दूसरे स्थान पर है। देश ने 58 टन सोना खरीदा। कुल मिलाकर, पीपुल्स बैंक ऑफ़ चाइना ने नवंबर 2022 से अब तक 120 टन सोना जोड़ा है।
यह उम्मीद के मुताबिक था। सेंट्रल बैंक ऑफ़ द रिपब्लिक ऑफ़ टर्की सबसे बड़े कीमती धातु खरीदारों में शीर्ष तीन में शामिल हुआ। पिछले साल टर्की सबसे बड़ा खरीदार था। इस तरह यह रुझान जारी है। देश के केंद्रीय बैंक ने पहली तिमाही में 30 टन सोना जोड़ा। इसके अलावा, उसने सोने की ईंटों के आयात पर आंशिक प्रतिबंध लगाया है।
7 टन जोड़ने के बाद भारत हमारी सूची में चौथे स्थान पर है। इससे उसके कुल सरकारी गोल्ड रिज़र्व बढ़कर 795 टन तक पहुँच गए हैं।
अब, आइए सोने के प्रमुख विक्रेताओं की सूची पर नज़र डालें।
कज़ाख़स्तान 20 टन सोना बेचकर सूची में सबसे ऊपर है। इसके बाद उज़्बेकिस्तान का केंद्रीय बैंक 15 टन सोना बेचकर दूसरे स्थान पर है। पहली तिमाही में 10 टन सोना बेचकर कंबोडिया शीर्ष 3 में शामिल है।
सोने की कीमतें 2,000 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जाने पर बिकवाली का रुझान कम हो सकता है। इसका मतलब है कि कम देश इस एसेट को बेचने के इच्छुक होंगे। इसके अलावा, अगर डी-डॉलराइज़ेशन जारी रहता है, तो इससे केंद्रीय बैंकों को अपने सोने के भंडार बढ़ाने पड़ेंगे।
आसान शब्दों में कहें तो, सोने की खरीदारी की रफ़्तार बहुत जल्द थम सकती है। कुछ देशों की केंद्रीय बैंक के मुख्य रिज़र्व एसेट के तौर पर USD रखने में अब दिलचस्पी नहीं रही।
आपकी ट्रेडिंग किस्मत आपका साथ दे!