
शुक्रवार की शुरुआत में वैश्विक बाज़ारों में घबराहट बनी रही। अमेरिका के बाहर ब्याज दरें कम होने की उम्मीदों के साथ भू-राजनीतिक चिंताएँ भी बाज़ार पर असर डाल रही हैं। इससे अमेरिकी डॉलर पिछले सप्ताह के नुकसान की भरपाई करते हुए पाँच महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया, जबकि EURUSD पर यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के नरम रुख वाले ठहराव का दबाव है।
इसके अलावा, GBPUSD के सेलर्स साल के निचले स्तर पर अहम सपोर्ट को चुनौती दे रहे हैं, जबकि USDJPY 1990 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर के आसपास उतार-चढ़ाव दिखा रहा है। ध्यान देने वाली बात है कि AUDUSD और NZDUSD ने पिछले दिन की करेक्शन वाली उछाल गंवा दी, जबकि USDCAD साल के ऊपरी स्तर पर मज़बूती बनाए हुए है।
US Dollar मज़बूत होने के बावजूद Gold की कीमत फिर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची। वहीं, Crude oil में मामूली बढ़त दर्ज हुई, जिससे पिछले दिन का नुकसान पलट गया और पांच सप्ताह की तेजी का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद बनी।
दूसरी ओर, BTCUSD और ETHUSD भी US Dollar की मज़बूती को नज़रअंदाज़ करते हुए साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहे हैं। बड़े अहम इवेंट्स से पहले क्रिप्टो बाज़ार को लेकर आशावाद से इन्हें सहारा मिल रहा है।
वॉल स्ट्रीट में कारोबार मिलाजुला रहा और एशिया-पैसिफ़िक के शेयर भी मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। Fed की सख्त नीति की उम्मीदों के बीच अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड यील्ड धीरे-धीरे बढ़ती रही।
प्रमुख एसेट्स में हालिया उतार-चढ़ाव इस प्रकार हैं:



अमेरिका के Core PPI YoY के मजबूत आंकड़े, Initial Jobless Claims में गिरावट और Fed अधिकारियों की सख्त टिप्पणियों से US Dollar Index (DXY) साल के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। Federal Reserve (Fed) के अधिकारियों में Boston Fed की अध्यक्ष Susan Collins और Richmond Fed के अध्यक्ष Thomas Barkin पर खास ध्यान रहा। इसके अलावा, New York Fed के अध्यक्ष John Williams का महंगाई को लेकर ऊंचा अनुमान और International Monetary Fund (IMF) की प्रबंध निदेशक Kristalina Georgieva की टिप्पणियां—जिनसे Fed की दरों में कटौती को लेकर अनिश्चितता का संकेत मिला—भी अमेरिकी डॉलर की बढ़त को सहारा दे रही हैं। यह तब भी है, जब उन्होंने 2024 में दरों में कटौती की संभावना के पक्ष में संकेत दिए।
भू-राजनीतिक तनावों की बात करें तो, ताइवान को हथियार बेचने के लिए दो अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ चीन की जवाबी कार्रवाई और यूक्रेन के ऊर्जा ठिकाने पर रूस के हमले ने बाज़ार की चिंताओं को बढ़ाया। इसी बीच, ऐसी खबरें आईं कि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने फिलीपींस के जहाज़ों पर चीन के हमलों को लेकर उसे चेतावनी दी है।
ध्यान देने वाली बात है कि गुरुवार की मौद्रिक नीति बैठक में ECB ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा। हालांकि, अध्यक्ष Christine Lagarde की टिप्पणियों से जल्द, संभवतः जून में, दरों में कटौती के संकेत मिले। इसके चलते EURUSD फरवरी में दर्ज साल के निचले स्तर की ओर फिसल गया। हाल में जर्मनी के निराशाजनक महंगाई आंकड़ों और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में तेज़ी ने यूरो की गिरावट को और बल दिया है।
मासिक GDP में नरमी के बावजूद, UK Manufacturing Production और Industrial Production के मज़बूत आंकड़े भी GBPUSD को सहारा नहीं दे पाए। Bank of England (BoE) के अधिकारियों के सख़्त रुख़ पर बाज़ार को भरोसा नहीं है, जिसका दबाव भी केबल पेयर पर पड़ रहा है। इसके अलावा, USDJPY की दिशा स्पष्ट नहीं है। जापान के कमजोर Industrial Production आंकड़े और Bank of Japan (BoJ) के तिमाही सर्वे से जापान में महंगाई की स्थिति को लेकर निराशावाद झलकता है। इससे कई साल के उच्च स्तर पर येन पेयर के खरीदारों को समर्थन मिलता है, लेकिन मज़बूत यील्ड और जापानी अधिकारियों के मौखिक हस्तक्षेप से इसकी बढ़त सीमित रहती है।
दूसरी ओर, न्यूज़ीलैंड का Manufacturing PMI लगातार 13 महीनों तक गिरा और मार्च में खाद्य महंगाई तथा इलेक्ट्रॉनिक कार्ड से होने वाली खुदरा बिक्री के आंकड़े भी नीचे आए, जिसके बाद NZDUSD दबाव में बना हुआ है। मजबूत अमेरिकी डॉलर ने AUDUSD पर भी दबाव डाला और पिछले दिन की सुधारात्मक तेजी को पलट दिया। चीन को लेकर निराशाजनक चिंताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच यह दबाव और बढ़ा है। इसके अलावा, Reserve Bank of Australia (RBA) का रुख भी नरम बना हुआ है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच बाज़ार का सोने पर भरोसा बढ़ रहा है और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें भी बनी हुई हैं। इस वजह से सोने की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर मज़बूत बनी हुई है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में भी खरीदारी लौटी है और गुरुवार की गिरावट की भरपाई हुई है। रूस, चीन और मध्य पूर्व से जुड़ी चिंताओं के कारण आपूर्ति में कमी और ऊर्जा की मांग बढ़ने की उम्मीदों के बीच कच्चा तेल साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है।
आगे, भारत के महंगाई और औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों के बाद UoM Consumer Sentiment Index (CSI) के शुरुआती आंकड़े और Fed अधिकारियों के कई भाषण बाजार प्रतिभागियों का ध्यान खींचेंगे। हालांकि, बाजार में बड़ी चाल की उम्मीद नहीं है, क्योंकि तयशुदा आंकड़ों में से अधिकांश अमेरिकी डॉलर की तेजी जारी रहने का संकेत देते हैं। इससे कमोडिटी की कीमतों में हालिया उछाल और AUD तथा NZD पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, अनिश्चित समय में पीली धातु पर ट्रेडर्स के भरोसे के चलते सोने की कीमतें मजबूत बनी रह सकती हैं।
आपकी ट्रेडिंग किस्मत आपका साथ दे!