डे ट्रेडिंग में ऑर्डर फ़्लो का इस्तेमाल उन ट्रेडर्स के लिए है जो उच्चतम स्तर पर खेलते हैं। यह अवधारणा सुनने में जितनी जटिल लगती है, वास्तव में उतनी नहीं है। फिर भी, इसके लिए ऑर्डर के प्रकारों की गहरी जानकारी और यह समझना ज़रूरी है कि वित्तीय बाज़ार कैसे और क्यों चलते हैं।

ज़्यादातर शुरुआती ट्रेडर्स को अक्सर यह ज़रा भी अंदाज़ा नहीं होता कि बाज़ार कैसे चलता है या ऑर्डर क्यों रुक गया, फिर भी वे "आँखें बंद करके" ट्रेडिंग करते हैं। ऑर्डर फ़्लो ट्रेडिंग रणनीति एक ऐसी कम-ज्ञात तकनीक है जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रो ट्रेडर्स करते हैं। इसे डे ट्रेडिंग के लिए एक स्वतंत्र रणनीति के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आप लंबी अवधि की रणनीतियाँ अपनाते हैं, तो यह आपके लिए उपयोगी नहीं होगी, क्योंकि आपकी ट्रेडिंग मुख्य रूप से फ़ंडामेंटल्स, टेक्निकल एनालिसिस और इंडिकेटर्स पर निर्भर करती है।
जैसा कि पहले बताया गया है, ऑर्डर फ़्लो की अवधारणा को समझने से डे ट्रेडर्स को अतिरिक्त फ़ायदे मिलते हैं। आपको ऐसे कई फ़ायदे मिलेंगे जो ज़्यादातर शुरुआती ट्रेडर्स को नहीं मिलते। ये हैं:
इस लेख में हम बताएंगे कि ऑर्डर फ्लो ट्रेडिंग की रणनीति कैसे काम करती है और इसे शुरू करने के लिए आपको किन चीज़ों की ज़रूरत होगी। लेकिन पहले, इस अवधारणा की बुनियादी बातों को अच्छी तरह समझते हैं।
इसका मकसद अलग-अलग तरह के बाज़ारों में ट्रेडिंग करते समय विभिन्न ऑर्डर टाइप का इस्तेमाल करना है। हर ऑर्डर टाइप खास जानकारी देता है। इन सभी का एक साथ इस्तेमाल करने से बाज़ार को अलग-अलग नज़रियों से गहराई से समझने में मदद मिलती है। इसलिए, सबसे पहले हमें मुख्य ऑर्डर टाइप समझने होंगे:



ऑर्डर टाइप और ऑर्डर फ्लो ट्रेडिंग रणनीति की अवधारणा को समझने से आपको लिक्विडिटी पहचानने में मदद मिलेगी। आप सेल और बाय लिमिट का वॉल्यूम देख पाएंगे। इससे ट्रेडरों को ज़्यादा विकल्प मिलते हैं, क्योंकि वे पर्याप्त लिक्विडिटी वाला कोई खास बाज़ार चुन सकते हैं और एक ही कॉन्ट्रैक्ट से भी बड़ा मुनाफ़ा कमा सकते हैं। आपको बस बाज़ार की सबसे अच्छी परिस्थितियों और विशेषताओं को पहचानना है।
यह रणनीति किसी भी फ़ाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट या बाज़ार के लिए उपयुक्त है। आम तौर पर, ट्रेडर इसका इस्तेमाल फ़्यूचर्स और स्टॉक्स में करते हैं। हालांकि, एक ही फ़ाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट वाले बाज़ारों में भी लिक्विडिटी का स्तर अलग-अलग हो सकता है, खासकर ऑयल फ़्यूचर्स में। आप जो भी करें, कम वोलैटिलिटी वाले बाज़ारों से बचें और लंबी अवधि की ट्रेडिंग में इस रणनीति का इस्तेमाल कभी न करें।
ऑर्डर फ्लो ट्रेडिंग रणनीति के लिए उपयुक्त फ़ाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट में शामिल हैं:
ऑर्डर फ्लो ट्रेडिंग के लिए ज़्यादा लिक्विडिटी वाले बाज़ार:
यहाँ सबसे चुनौतीपूर्ण काम ज़रूरी डेटा तैयार करना है। काम की गति बनाए रखने के लिए आपको खास सॉफ़्टवेयर और कुछ अन्य टूल्स की ज़रूरत होगी।
सबसे पहले, आपको एक भरोसेमंद ब्रोकर चुनना होगा और अकाउंट खोलें। इसके बाद आपको डेटा फ़ीड की ज़रूरत होगी। आम तौर पर, आपके चुने हुए ब्रोकर से ही यह डेटा फ़ीड मिलता है। उदाहरण के लिए, MTrading के साथ रोज़ाना टेक्निकल एनालिसिस, एनालिटिक्स और न्यूज़ मिलते हैं, जो आपको सबसे ज़्यादा लिक्विडिटी वाला बाज़ार पहचानने में मदद करेंगे।
बेहतर होगा कि आप ब्रोकर का अपना डेटा फ़ीड इस्तेमाल करें। अगर आप इसे अलग से तैयार करने का फ़ैसला करते हैं, तो आपको अतिरिक्त फ़ीस देनी होगी। कुछ ट्रेडर CQG या Rithmic जैसी खास सेवाएँ चुनते हैं। इनकी मुख्य कमी यह है कि ये सभी मासिक बिलिंग वाले सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम करती हैं। अगर आप अलग ऑर्डर फ़्लो सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल करते हैं, तो आपको उसे ब्रोकर अकाउंट से कनेक्ट करना होगा। आख़िर में, यह पक्का कर लें कि आपके बैलेंस में पर्याप्त फ़ंड हैं। अगर नहीं हैं, तो बैलेंस में फ़ंड जोड़ें और ट्रेडिंग शुरू करें।
इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।