हर ट्रेडर को अपने करियर में किसी न किसी मोड़ पर इसी दुविधा का सामना करना पड़ता है। मुनाफ़ा लेने का सबसे सही समय कब है और नुकसान को जल्दी रोकना कब बेहतर है? यह फ़ैसला हमेशा मुश्किल होता है। ट्रेलिंग स्टॉप लॉस का मकसद बाज़ार के प्रतिभागियों को अनुशासन के साथ ट्रेड करने में मदद करना है।

कुछ निवेशक ट्रेंड के पलटने का इंतज़ार करते हुए एसेट होल्ड करना पसंद करते हैं। वहीं, कुछ लोग कीमत बढ़ने पर शेयर बेचने के तरीके तलाशते हैं। यहां सबसे बड़ी चुनौती गलतियों से बचना है। इसलिए, जोखिम प्रबंधन की प्रभावी रणनीति के लिए ट्रेलिंग स्टॉप लॉस ऑर्डर का इस्तेमाल करना ज़रूरी है।
इस लेख में हम बताएंगे कि यह इंस्ट्रूमेंट कैसे काम करता है और वास्तविक बाज़ार स्थितियों में इसे इस्तेमाल करने के कई तरीके भी समझाएंगे।
ट्रेलिंग स्टॉप लॉस एक तरह का स्टॉप लॉस ऑर्डर है। यह ट्रेडिंग और जोखिम प्रबंधन के इंस्ट्रूमेंट का मेल है। साथ ही, जब आप मुनाफ़े को बाज़ार की अप्रत्याशित चालों से सुरक्षित रखना चाहते हैं, तब यह टूल काम आता है। ट्रेडर इसका इस्तेमाल हर ट्रेड के मुनाफ़े को लॉक करने के लिए करते हैं।
ट्रेलिंग स्टॉप लॉस ऑर्डर बैलेंस को सुरक्षित रखने में मदद करता है और यह भी सीमित करता है कि कुछ गड़बड़ होने और ट्रेड के उम्मीद के मुताबिक काम न करने पर आपको कितना नुकसान हो सकता है। यह इंस्ट्रूमेंट अपने आप ट्रिगर होता है। ट्रेड के दौरान इसे मैन्युअल रूप से सेट करने की ज़रूरत नहीं होती। इसे चुने हुए ऑनलाइन ब्रोकर के साथ काम करने वाला ट्रेडिंग सॉफ़्टवेयर सक्रिय करता है। हालांकि, आप इस प्रक्रिया पर नियंत्रण बनाए रख सकते हैं और इंस्ट्रूमेंट के लिए मैन्युअल सेटिंग्स का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।



इसे लगाने का तरीका पारंपरिक स्टॉप लॉस ऑर्डर जैसा ही है। उदाहरण के लिए, अगर आप अपने बाय ऑर्डर को ट्रेलिंग स्टॉप लॉस से सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो इसे ट्रेड में एंट्री की कीमत से नीचे लगाएं।
दोनों ऑर्डर के बीच मुख्य अंतर यह है कि ट्रेलिंग स्टॉप लॉस कीमत के साथ आगे बढ़ता है। इससे आपके पास बदलाव करने की ज़्यादा गुंजाइश रहती है और जोखिम प्रबंधन के मामले में आपकी ट्रेडिंग रणनीति थोड़ी ज़्यादा लचीली हो जाती है।
उदाहरण के लिए, अगर कीमत हर बार 5 पॉइंट बढ़ती है, तो ट्रेलिंग स्टॉप लॉस भी 5 पॉइंट आगे बढ़ेगा। कीमत चाहे जिस तरह आगे बढ़े, यह इंस्ट्रूमेंट ट्रेड की दिशा में उसी के अनुसार आगे बढ़ेगा। लेकिन, अगर कीमत गिरती है, तो स्टॉप लॉस आगे नहीं बढ़ेगा।
ट्रेडर इस तरह का ऑर्डर लगाने के लिए कई तकनीकें अपना सकते हैं। सही तकनीक चुनने और टूल लगाने की सबसे अच्छी जगह पहचानने के लिए उन्हें कुछ खास टेक्निकल इंडिकेटर की ज़रूरत होगी।
ट्रेलिंग स्टॉप लॉस सेट करने के लिए मूविंग एवरेज इंडिकेटर का इस्तेमाल करना अच्छा तरीका है। इसके लिए आपको बस कुछ आसान चरण पूरे करने होंगे:
एक लोकप्रिय तरीका एवरेज ट्रू रेंज इंडिकेटर का इस्तेमाल करना है। यह ट्रेलिंग स्टॉप के आधार पर वोलैटिलिटी सेट करने में मदद करता है। इन चरणों पर ध्यान दें:
यह प्रक्रिया काफ़ी आसान है। ऑर्डर सेट करने के लिए किसी ख़ास कौशल की ज़रूरत नहीं होती। आपको बस कुछ ऐसे इंडिकेटर चाहिए, जो आपके MT4 प्लेटफ़ॉर्म में पहले से इंटीग्रेटेड हैं।
यह टूल काफ़ी काम का हो सकता है, ख़ासकर तब जब बाज़ार में उतार-चढ़ाव हो और आप संभावित मुनाफ़ा गंवाना न चाहें। हालांकि, इसके कुछ नुकसान और जोखिम भी हैं।
फ़ायदे:
नुकसान:
बेशक, ट्रेलिंग स्टॉप लॉस नए ट्रेडरों को अनुशासित बने रहने में मदद करने वाला एक बढ़िया टूल है। इसमें ट्रेड और जोखिम प्रबंधन के तरीकों की खूबियाँ शामिल हैं, जिससे ट्रेड में बने रहने के लिए यह काफ़ी लचीला बन जाता है। यूज़र इसे स्वचालित तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं या अपनी ज़रूरत के मुताबिक मैन्युअल रूप से सेट कर सकते हैं। स्टॉप लॉस सेट करने के लिए आपको कुछ खास टेक्निकल इंडिकेटर इस्तेमाल करने होंगे।
इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।